PATNA : लद्दाख़ में चीन के साथ भारत का तनाव और संघर्ष. 20 भारतीय सैनिकों की मौत. चीन के ऐप्स को बंद किया जाना. ‘आत्मनिर्भर भारत’ का ‘बायकॉट चाइना’ सरीखा अनुवाद होना और इस सबके बीच भारत सरकार एक काम करती है. सरकार एक ऐसे बैंक से लगभग 9202 करोड़ रुपए लोन लेती है, जिसमें चीन की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इस पैसे का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के लिए किया जाता है. राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी ये पैसा दिया जाता है, ताकि वे कोरोना से लड़ाई लड़ सकें. कांग्रेस इसे लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है, लेकिन हम आपको पूरी कहानी बताएंगे. सबसे पहली बात तो ये कि ये जानकारी सामने कैसे आई? सरकार ने ख़ुद ही बताया. भाजपा सांसद सुनील कुमार सिंह और पीपी चौधरी ने सरकार से सवाल किए थे. जवाब दिया वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने. किस बैंक की हम बात कर रहे हैं? Asian Infrastructure Investment Bank (AIIB). इस बैंक में चीन का सबसे ज्यादा शेयर है. चीन के बाद भारत इस बैंक में सबसे बड़ा हिस्सेदार है.

अब जानिए अनुराग ठाकुर का जवाब
भारत सरकार ने AIIB के साथ दो लोन अग्रीमेंट साइन किए हैं. पहला लोन अग्रीमेंट 8 मई को साइन किया गया था, जो 500 मिलियन US डॉलर का था. और दूसरा 19 जून को, जो 750 मिलियन डॉलर का था. पहले लोन में से 251.25 मिलियन डॉलर मिल गए हैं. जबकि दूसरा लोन पूरा मिल गया है. और इसका उपयोग प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत किया गया है.
कांग्रेस ने यह कहा
लोन के लिए क़रार जिन तारीख़ों पर साइन किए गए, वे अहम हैं. मसलन, 8 मई को पहला लोन साइन किया गया. ये वो समय था, जब भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख़ में स्टैंडऑफ़ की ख़बरें आने लगी थीं. दूसरे लोन पर 19 जून को दस्तखत किए गए. यानी 15 जून- जिस दिन चीन ने भारत के 20 सैनिकों की हत्या की थी- उससे 4 दिन बाद. अब इस लोन और इन्हीं तारीख़ों को लेकर कांग्रेस हमलावर हो रही है. पार्लियामेंट हाउस कॉम्प्लेक्स के बाहर पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा. वहीं राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि “19 जून देश के इतिहास में एक काला दिन है. इस दिन देश के प्रधानमंत्री ने देश से झूठ बोला. उन्होंने न सिर्फ़ चीन को क्लीन चिट दी, बल्कि इसी दिन चीन में मौजूद बैंक से लोन का क़रार भी साइन किया. तब तक हमारे 20 सैनिक चीनी सेना के साथ संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके थे.”

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AIIB में चीन की हिस्सेदारी लगभग 26.61 प्रतिशत है. भारत की हिस्सेदारी 7.6 प्रतिशत है. AIIB का प्रस्ताव सबसे पहले साल 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ़ से दिया गया था. मकसद था, एशियाई देशों को वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फ़ंड (IMF) की सहायता के बिना इन्फ़्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट के लिए मदद मिल सके. बैंक चीन की राजधानी बीजिंग में मौजूद है. कई जगहों पर ये बात कही जा रही है कि इस बैंक से लोन लेने का मतलब ये नहीं कि लोन चीन से लिया गया है. ये बैंक चाइनीज़ नहीं है, बल्कि चीन की सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाला बैंक है. इसमें चीन और भारत के अलावा कुल 100 देश हैं.

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