PATNA : बिहार में उद्योगों (Industries in Bihar) को लेकर एक बार फिर से निराश करने वाली खबर आई है. उद्योगों के लिए रजिस्ट्रेशन में एक नंबर रहने के बाद भी बिहार में उद्योगों को लगाने का माहौल नहीं बन पाया है. यही कारण है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of doing business) में बिहार को 26वां स्थान मिला है, जबकि बिहार के पड़ोसी राज्यों ने कहीं बेहतर माहौल के कारण अच्छा स्थान पाया है. पड़ोसी राज्य झारखंड को 5वां स्थान मिला है, वहीं यूपी को दूसरा स्थान मिला है. बिहार पिछली बार 18 वें स्थान पर था और इस बार प्रदर्शन और कम रहने के कारण 26वें स्थान पर है.

ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का अर्थ है कि देश में कारोबार करने में कारोबारियों को कितनी आसानी होती है. अर्थात किसी देश में कारोबार शुरू करने और उसे चलाने के लिए माहौल कितना अनुकूल है. ये विश्व बैंक के द्वारा देश स्तर पर किया जाता है. केंद्र सरकार ने स्टेट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान 2018-19 की रैंक 5 सितम्बर को जारी की है जिसमे बिहार को 26 वां स्थान मिला है. 2017-18 में बिहार का स्थान 18वां था. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का अर्थ है कि राज्य में कारोबार करने में कारोबारियों को कितनी आसानी होती है माहौल कितना अनुकूल है. इस बार की रैंकिंग का निर्धारण पूरी तरह से यूजर्स की फीडबैक पर आधारित है जिनमें सूचना पाना कितना सुलभ है, कारोबार करने के लिए परमिट कितनी जल्दी मिलती है ,जमीन की उपलब्धता कैसी है. इस तरह से 180 मानक और 35 हजार से अधिक फिड बैक पर रैंकिंग तैयार की गई है.

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बिहार के 26वें स्थान पर आने से बिहार में उद्योग और व्यवसायी संगठन काफी चिन्तित हैं. बीआईए के अध्यक्ष राम लाल खेतान ने बताया कि ये वाकई चिंताजनक है और हमें आकलन करने की जरूरत है. बीआईए अध्यक्ष ने बिहार के पीछे होने के कारणों पर यह बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम राज्य के लिए बनाया गया है लेकिन सही ढंग से कम नहीं कर रहा है. अभी भी व्यवसायियों को इससे पूरी मदद नहीं मिल पा रही है. अभी चुनाव का मौसम है और जो सरकार बनेगी, निश्चित ही उससे बिहार को काफी फायदा होगा. राजधानी के ही व्यवसायी और कैट के अध्यक्ष कमल नोपानी ने यह बताया कि कई कारण हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है जमीनों का उपलब्ध नहीं होना और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता. कैट के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि व्यवसायी उद्योग लगाने को इक्छुक है और भारी संख्या में रजिस्ट्रेशन भी हुआ है लेकिन कुछ कारणों और बैंकों के रवैये ने उद्योगों को पनपने नहीं दिया है और यही सब कारणों से रैंकिंग गिरी है लेकिन कमल नोपानी ने यह भी आशा किया कि स्थिति जल्द सुधर जाएगी.

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