PATNA : बिहार में इस बार कड़ाके की ठंड के आसार हैं। ‘ला नीना’ के प्रभाव से दिसंबर मध्य से लेकर जनवरी मध्य तक कोल्ड वेव या कोल्ड डे की स्थितियां बार-बार बन सकती हैं। मौसमविदों के अनुसार इस बार भले ही ठंड ने सूबे में देर से दस्तक दी है लेकिन इसका व्यापक प्रभाव दिखने के आसार हैं। सूबे में ठंड का कहर फरवरी महीने तक रहने का पूर्वानुमान है। अभी से ही यह दिखने भी लगा है। न्यूनतम पारा सामान्य से तीन डिग्री तक नीचे आ गया है। इस वजह से रात में ठंड की अनुभूति होने लगी है। दिन में आसमान साफ रहने की वजह से अभी अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह रहा है लेकिन जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव शुरू होंगे। दिन के तापमान में तेजी से गिरावट आएगी। अब पछुआ हवाएं बहने लगी हैं। रात में आसमान के साफ होने की वजह से पृथ्वी की ऊष्मा का उत्सर्जन हो रहा है। इस वजह से न्यूनतम पारे में गिरावट भी आने लगी है। शुक्रवार को पटना का न्यूनतम पारा सामान्य से तीन डिग्री नीचे 15.4 डिग्री जबकि गया में 13.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसमविदों का कहना है कि इस बार बिहार में मानसून सीजन काफी बेहतर रहा था। अब मानसून राज्य की सीमा से विदा ले चुका है। पछुआ हवाओं के आगमन के साथ ठंड ने दस्तक दे दी है। इस साल सूबे में ज्यादा दिनों तक पुरवा प्रभावी रहने की वजह से काफी दिनों तक वातारवण में नमी की मात्रा बनी रही। इसी वजह से ठंड के आगमन में इस बार देरी हुई। उच्च रक्त चाप के मरीजों के लिए अभी विशेष सतर्कता बरतने वाला मौसम है। अभी न्यूनतम तापमान में हर दिन गिरावट आ रही है साथ ही हवाओं की गति अधिक न होने से प्रदूषण का प्रभाव भी वायुमंडल में रह रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक वायमंडलीय दाब का असर भी ऐसे मरीजों पर होता है। ऐसे में मौसमविदों और चिकित्सकों ने ब्लड प्रेशर के मरीजों को इस मौसम में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए है।

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मानसून के अंत में भी अच्छी खासी बारिश से खेतों में नमी बरकरार है। इस वजह से रबी की बुआई में इस बार आंशिक देरी तय है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार धान की फसल के साथ साथ रबी की पैदावार भी अच्छी होगी। इस मामूली देरी से रबी की फसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखेगा। अल-नीनो जैसी एक अन्य प्राकृतिक घटना ला-नीना कहलाती है। ला नीना एक प्रतिसागरीय धारा है। इसका आविर्भाव पश्चिमी प्रशांत महासागर में उस समय होता है जबकि पूर्वी प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रभाव समाप्त हो जाता है। ला-नीना की स्थितियां पैदा होने पर भूमध्य रेखा के आस-पास प्रशान्त महासागर के पूर्वी तथा मध्य भाग में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से ठंडा हो जाता है। मौसमविद इसे कोल्ड इवेंट का नाम भी देते हैं। ला-नीना यानी समुद्र तल की ठंडी तापीय स्थिति आमतौर पर अल-नीनो के बाद आती है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि दोनों बारी-बारी से आएं ही। एक साथ कई अल-नीनो भी आ सकते हैं। अल-नीनो के पूर्वानुमान के लिये जितने प्रचलित सिद्धान्त हैं, उनमें यह मान्यता है कि विषुवतीय समुद्र में सन्चित ऊष्मा एक निश्चित अवधि के बाद अल-नीनो के रूप में बाहर आती है। इसलिये समुद्री ताप में हुई अभिवृद्धि को मापकर अल-नीनो के आगमन की भविष्यवाणी की जा सकती है।

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