PATNA : बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहर में लगातार 12 दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। धीरे-धीरे इसके पानी का दबाव नदी के बांध पर भी पड़ने लगा है। जिससे शहर पर बाढ़ का खतरा बरकरार है। बताया जाता है कि पानी के बढ़ने की दर घट गई है। अब इसके स्थिर होने की संभावना है। बावजूद नदी का जलस्तर खतरे के निशान 45.73 से 2.84 मीटर उपर बढ़कर 48.57 मीटर हो गया है। जो नदी के उच्चतम जलस्तर 48.83 से महज 26 सेंटीमीटर नीचे है। बताया जाता है कि नदी का जलस्तर अपने उच्चतम जलस्तर को पार करेगा तो शहर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाएगा। खासकर मगरदही घाट व धरमपुर रेलवे लाइन के निकट पानी बाइपास के करीब पहुंच गया है। नदी के आधा मीटर तक और बढ़ने की स्थिति में पानी बाइपास को क्रॉस सकता है। वहीं रेलवे पुल के गाटर में पानी सटने के बाद से लगातार उपर की ओर चढ़ रहा है। अब नए रेल पुल का पाया भी डूबने के कगार पर है। बूढ़ी गंडक की पेटी में बसे लोगों के घरों में पानी घुस गया है। करेह नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से पूर्वी तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बढ़ती जा रही है। जर्जर तटबंध पर पानी के दबाव से बांध में रिसाव होना स्थानीय प्रशासन के साथ वहां बसे ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

गोपालगंज: 400 गांव का बाजार व मुख्यालय से संपर्क टूटा
भले ही गंडक के जलस्तर में दूसरे दिन भी नरमी देखने को मिली, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नदी का जलस्तर अपनी मुख्य धारा में 8 सेमी नीचे गया है। मांझा व बरौली के कुछ इलाके में बाढ़ का पानी 3 से 4 सेमी कम हुआ है। लेकिन सिधवलिया और बैकुंठपुर कई ऐसे इलाके हैं जहां बाढ़ का पानी अभी भी बढ़ रहा है। मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर के 400 गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह से सड़क, बाजार और मुख्यालय से कट गए हैं।

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सीवान: दाहा-सरयू के बाद धमई नदी मचा रही तबाही
गोरेयाकोठी प्रखंड क्षेत्र से गुजर रही धमई नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच एक सप्ताह से करीब 10 पंचायतों के गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। इसके कारण लोग पलायन काे मजबूर हैं। बाढ़ का पानी नए इलाकों में भी प्रवेश कर रहा है। लगातार अंचल व प्रखंड प्रशासन द्वारा हर बिंदुओं पर विशेष नजर रखी जा रही है। बाढ़ का पानी गोरेयाकोठी स्थित प्रखंड सह अंचल कार्यालय थाना परिसर सहित अन्य कार्यालय तक पहुंच गया है। इसके अलावा बाढ़ की इस समस्या से भिट्ठी, सठावार, शेरपुर, घुसुकपुर सहित अन्य नए गांव प्रभावित हो चुके हैं। करीब 1 सप्ताह से ग्रामीण नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच सड़क किनारे घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। गहरे पानी के कारण कई लोग कम्युनिटी किचन में नहीं पहुंच पा रहे हैं। गोरेयाकोठी थाने की बात की जाए तो वहां पूरे परिसर में पानी ही पानी है। थाने के अंदर तक पानी घुस गया है। इसके अंदर रखे गए कागजात भी नष्ट हो रहे हैं। पुलिस स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है।

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