Patna: नहाय खाय के साथ ही आस्था का महापर्व चैती छठ शनिवार से शुरू हो चुका है और आज दूसरे दिन खरना की पूजा होगी. आज व्रती सुबह से निर्जला उपवास रखेंगी और फिर शाम के समय चावल-गुड़ की खीर, रोटी या पूड़ी बनाकर फल-फूल से विधिवत पूजा कर भगवान भास्कर को भोग अर्पित करेंगे. इसके बाद खुद इस प्रसाद को ग्रहण करेंगे, उसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा.

शनिवार को व्रतियों ने स्नान कर विधिवत नहाय-खाय की पूजा की और घर पर ही कद्दू भात का प्रसाद बनाया. पूजा के बाद अपने सगे-संबंधियों के साथ व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया. नहाय-खाय के बाद आज खरना की पूजा होगी और फिर व्रती सोमवार 30 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे और फिर मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चैती छठ पूजा संपन्न हो जाएगी.

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बता दें कि छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. एक अभी चैत्र माह में दूसरा कार्तिक माह में. बिहार में इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम और पूरी निष्ठा के साथ मनाया जाता है. चार दिनों के इस अनुष्ठान में सफाई और पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है.

इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है. इस पर्व में व्रती लगातार 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जो अपने आप में बड़ी बात है. यह त्योहार पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है. अब तो छठ पर्व देश के साथ ही विदेशों में भी मनाया जाने लगा है.

छठ पूजा विशेष: जाने क्या है खरना का ...

छठ पर्व का पौराणिक महत्व

छठ पर्व में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता ह, जो मूर्त रूप से इस धरा पर विद्यमान हैं और उनसे पूरी दुनिया को ऊर्जा प्राप्त होती है और इसके साथ ही नदी या तालाबों में जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने का प्रावधान है, जो अपने आप में अनूठा है

पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं. शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है. पुराणों में इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है. षष्ठी देवी को ही बिहार-झारखंड की स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है.

लॉकडाउन का दिख रहा असर

छठ पर्व पर लोग एक साथ मिलकर नदियों या तालाबों के पास एकत्र होते हैं, घर में भी लोग काफी संख्या में व्रती के यहां प्रसाद ग्रहण और पूजा में शामिल होने पहुंचते हैं. लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से लोगों से घर में रहने की अपील की गई है. इसलिए इस बार लोग नदियों में, या तालाबों में अर्घ्य नहीं दे पाएंगे. छठ पूजा को इस बार धूमधाम से नहीं शांतिपूर्वक मनाने की अपील की गई है, ताकि लोग पूजा अपने घरों में रहकर करें. क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए ये सही होगा.

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