विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले पर कोरोना संकट का साया, अब तक तैयारी नहीं हुई शुरू

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले पर इस बार कोरोना संकट का असर दिखने लगा है। मेला शुरू होने में एक महीने का समय बचा है, लेकिन अभी तक तैयारी भी शुरू नहीं हुई है। आमतौर पर तीन महीने पहले से प्रशासनिक तैयारी शुरू हो जाती थी। मेला के स्वरूप को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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राजकीय दर्जा प्राप्त श्रावणी मेला छह जुलाई से शुरू होने वाला है। अभी तक तैयारी को लेकर प्रशासनिक बैठकें शुरू नहीं हो पायी हैं। मेला को लेकर प्रशासन कार्ययोजना भी तैयार नहीं कर सका है। 2019 में 17 जुलाई से श्रावणी मेला शुरू हुआ था। मेला की तैयारी को लेकर 27 मई को बैठक आयोजित की गयी थी। 30 अप्रैल को ही सभी अधिकारियों को बैठक की जानकारी देते हुए प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया गया था। 13 जून को संबंधित विभागों को तैयारी के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया गया था।

जिला प्रशासन द्वारा बिजली, पीएचईडी, सिंचाई, नगर परिषद, एनएच और पथ निर्माण विभाग सहित मेला से जुड़े विभागों को तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया गया था। सुल्तानगंज से देवघर की दूरी करीब 105 किमी है। सुल्तानगंज से देवघर के बीच 14 किमी भागलपुर, 26 किमी मुंगेर और 65 किमी बांका जिले में पड़ता है, लेकिन कांवरिया पथ की मरम्मत का कार्य अभी शुरू नहीं किया गया है। घाटों की स्थिति खतरनाक बनी हुई है। बिजली के पोल-तार कब बदलने, शौचालय, पेयजल, धर्मशाला आदि को तैयार करने का काम शुरू नहीं हुआ है।

एक महीना अनवरत चलता है मेला
श्रावणी मेला एक महीने तक चलता है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा दूसरे देशों से भी शिवभक्त उत्तरायन गंगा का जल लेने के लिए सुल्तानगंज आते हैं। सावन के चार-पांच दिन पहले से बंगाल और असम से कांवरियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हर साल 50 लाख से अधिक कांवरिया जल लेकर देवघर और बासुकीनाथ जाते हैं। मेला में दुकान सहित विभिन्न कामों में एक लाख से अधिक परिवार जुड़ता है। तीन महीने पहले से दुकान की जगह चिह्नित कर बांस-बल्ला गाड़ना शुरू कर देते थे। कांवर, गेरुआ रंग का गंजी, पेंट, पीने का पानी पीने का बोतल, गमछी, टोपी, लोटा, घुंघरू, घंटी, फूल, धूपदानी, पॉलिथिन और पूजा सामग्री लोग एक महीना पहले से मंगा कर रखते थे। 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। सुल्तानगंज से देवघर के बीच सौ से अधिक जगहों पर धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसमें काफी संख्या में दूसरे शहरों के अलावा स्थानीय कलाकार भाग लेते हैं।

मारवाड़ी युवा मंच सुल्तानगंज के प्रवक्ता सुनील मुरारका ने कहा कि स्थानीय लोग प्रशासन की तरफ देख रहे हैं। कारोबारियों को पैसा फंसने का डर सता रहा है। इसके चलते सामान का ऑर्डर भी नहीं दे रहे हैं। नगर परिषद सुल्तानगंज के कार्यपालक पदाधिकारी सुमित्रानंदन ने कहा कि तैयारी शुरू नहीं हुई है। दो सड़कों का निर्माण कराया गया है। सरकार ने मेला के लिए एक करोड़ रुपये आवंटन की मांग की गयी है। सरकार से निर्देश मिलने के बाद तैयारी शुरू कर दी जायेगी।

मेला की तैयारी रहेगी: प्रणव
भागलपुर के डीएम प्रणव कुमार ने कहा कि मेला की तैयारी रहेगी, लेकिन जाहिर तौर पर कोरोना संकट के चलते कुछ नियमों में बदलाव होगा। सामाजिक दूरी का पालन करना होगा। सुल्तानगंज से जल लेकर लोग देवघर जाते हैं। बिहार और झारंखड सरकार से मामला जुड़ा हुआ है। देवघर की तैयारी पर भी मेला निर्भर करेगा। जिला प्रशासन तैयारी करेगी। समय से हिसाब से सरकार का जो निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा।

तैयारी शुरू की जायेगी: सुहर्ष
बांका के डीएम सुहर्ष भगत ने कहा कि देवघर डीसी से बात हुई है। उनके द्वारा बताया गया कि मंदिर में पूजा के दौरान होने वाली भीड़ को लेकर झारखंड सरकार द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बांका जिला प्रशासन तैयारी शुरू कर रहा है। सरकार के निर्देश के अनुसार काम किया जाएगा।

विचार-विमर्श के बाद निर्णय: मंत्री
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल ने कहा कि श्रावणी मेला को लेकर तुरंत कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस पर विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। अभी लॉकडाउन खत्म हुआ है। आपस में समीक्षा करने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

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