PATNA ; आपको वह गाना याद है. भोजपुरी वाला. जिसमे कल्पना पटवारी का स्वर था. गीत के बोल लिखे थे विनय बिहारी ने. गाने के बोल थे एगो चुम्मा ले ल राज ाजी बन जाइ जतरा….एल्बम का नमा था गवनवां लैइ जा राजा जी. एक वह दिन था और एक आज का दिन है. असम में जन्म लेने वाली भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी ने फिर कभी पीछे पीछे मुड़कर नहीं देखा. इस बीच एक के बाद एक कई हिट एल्बम देने का रिकॉर्ड कल्पना पटवारी के नाम दर्ज हुआ. एक वह भी दौर आया जब भक्ति संगीत की दौड़ में कल्पना पटवारी रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाती चली गई. आज भी लोगों के जेहन में वह गाना याद है जिस में शिव पार्वती के बीच का संवाद है और गाने के बोल थे भंगिया हमसे ना पिसाई ए गणेश के पापा हम नैहर जात बानी

भोजपुरी गीत संगीत का यह वह दौड़ था जब अ’श्लीलता के नाम पर कुछ भी दर्शकों के सामने परोस दिए जाते थे. कल्पना पटवारी भी इस बीमारी से अछूती ना रही . उन्होंने भी एक के बाद एक कई ऐसे गाने गाए जिसे परिवार में सभी लोगों के साथ बैठकर नहीं सुना जा सकता. एक वह भी दौर आया जब कल्पना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गांधी, गंगा और भिखारी ठाकुर के गीतों को लेकर पहुंची और ब्रांड भोजपुरी को कायम किया. इन दिनों कल्पना पहली बार मैथिली मंच पर नजर आ रही है. आश्चर्य का विषय है कि यहां भी कल्पना कवि कोकील विद्यापति के गीतों को गाती नजर आ रही है और दर्शक ताली बजाकर उनका स्वागत करते हैं।

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें कल्पना मैथिली गीत जय जय भैरवी गाती हुई नजर आ रही है. मंच गुवाहाटी का ऐतिहासिक मिथिला सांस्कृतिक समन्वय समिति की ओर से आयोजित विद्यापति समारोह का है. जानकारी अनुसार कल्पना को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. आश्चर्य का विषय यह है कि भोजपुरी मंच का जाना पहचाना नाम इन दिनों आखिर कर क्यों मैथिली मंच पर आने को विवश हो रही है.

उल्लेखनीय है कि भोजपुरी के मंचों पर या भोजपुरी कार्यक्रम करने के दौरान कई बार स्थानीय लोगों ने जमकर कल्पना पटवारी का विरोध किया था और उनके नए रूप को ड्रामा बताते हुए कहा था कि आपने हमारी भोजपुरी भाषा सभ्यता और संस्कृति को खराब किया है.

REPORT-PRIYA KUMARI

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