PATNA : लॉकडाउन के दौर में सीमा पर आवाजाही पर रोक का असर भारत-नेपाल के बीच बेटी-रोटी के रिश्ते पर भी पड़ने लगा है। अब दोनों देशों के बीच पहले से तय शादियां या तो टलने लगी हैं या टूटने लगी हैं। सिर्फ पिथौरागढ़ इलाके में ही मार्च से जुलाई के बीच 60 से अधिक शादियां टालनी पड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा बंद होने से दोनों देशों के बीच आवाजाही ठप हो गई है। इसका असर धार्मिक, सांस्कृतिक मेल-मिलाप पर पड़ रहा है। धारचूला के रं यूथ संस्था के हरीश कुटियाल कहते हैं बीते मार्च से जुलाई के धारचूला क्षेत्र में करीब 50 लोगों की शादी नेपाल से होनी थी, लेकिन पुल बंद होने से शादियां टालनी पड़ीं। लॉकडाउन के कारण कई रिश्ते तो हुए ही नहीं। झूलाघाट में भी करीब 10 लोगों को शादी टल गई है। झूलाघाट की ज्योति चंद कहती हैं कि दस साल में पहली बार लोकपर्व सातू-आठूं पर मायके नहीं पहुंच पाई। ज्योति ने बताया कि उनकी जैसी सैकड़ों महिलाएं दोनों देशों में हैं जो परिवार से मिलने को भी तड़प गई हैं। इसके अलावा कोरोना वायरस की मार भाई-बहन के त्योहार रक्षाबंधन पर भी पड़ी।

कोरोना के कारण 22 मार्च से जोगबनी सीमा बंद है। कोई चहलकदमी न हो इसके लिए नेपाल में वाच टावर तक का निर्माण कराया गया है। शादियों पर ब्रेक लग गया है। अररिया के फारबिसगंज निवासी राजू कुमार ने कहा कि उनकी दो-दो बहनों की शादी नेपाल के दूहबी में हुई है। लेकिन पिछले पांच माह से मिलना जुलना मुश्किल हो गया है। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से लेकर मधुबनी तक हर साल हजारों भारतीय व नेपाली परिवार बेटे-बेटी की एक-दूसरे के यहां शादी करते रहे हैं। लेकिन पहले से तय शादियां टल या टूट रही हैं। जिनकी शादी पहले हो चुकी है वे खुशी-गम के मौकों पर मायके नहीं जा पाती हैं।

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