PATNA : कश्मीर पर दुनिया भर में मुंह की खाने के बाद बौखलाये पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चैलेंज कर दिया है और पीओके में रैली करने का न्योता दिया है. पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पीएम मोदी को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में रैली करने का न्‍योता द‍िया है. साथ ही इमरान खान को श्रीनगर जाने की अनुमति देने की भी मांग कर डाली. शाह कुरैशी ने कहा, इससे दुनिया को पता चल जाएगा कि किस नेता का कितना स्‍वागत कश्‍मीर में होता है. दरअसल पाकिस्‍तानी व‍िदेश मंत्री ने पाक मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं भारत के प्रधानमंत्री को आखिरी पैगाम है. आज कश्‍मीर में आर्टिकल 370 के खात्‍मे का एक साल पूरा हो गया है. मैं पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री के नाते आपको न्‍योता देता हूं कि अगर आपको अपनी नीतियों पर भरोसा है तो मुजफ्फराबाद में कश्‍मीरियों के सामने रैली करें और देख लें किस तरह से आपका स्‍वागत होता है. अगर आपमें हौसला है तो आप इमरान खान को श्रीनगर जाने दें और देख लें कि इमरान खान का कश्‍मीर में किस तरह से कश्‍मीर में स्‍वागत होता है.

गौरतलब है कि भारत के एक शीर्ष राजनयिक ने बताया कि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिश चीन द्वारा इस मामले पर चर्चा के लिए बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के बेनतीजा रहने के बाद एक बार फिर नाकाम’ रही. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने बताया कि सुरक्षा परिषद के कई सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर के भारत और पाकिस्तान का एक द्विपक्षीय मामला होने की बात रेखांकित की और शिमला समझौते के महत्व पर जोर दिया.

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तिरुमूर्ति ने कहा, संयुक्त राष्ट्र के जरिए इस मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का पाकिस्तान का प्रयास एक बार फिर नाकाम रहा. उन्होंने ट्वीट किया, पाकिस्तान का एक और प्रयास विफल रहा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसी) की बंद कमरे में की गई, अनौपचारिक बैठक बेनतीजा रही. लगभग सभी देशों ने जम्मू-कश्मीर के एक द्विपक्षीय मामला होने और इसके परिषद का समय एवं ध्यान देने लायक ना होने की बात को रेखांकित किया. पाकिस्तान के करीबी सहयोगी चीन ने ‘एनी अदर बिजनेस’ के तहत बुधवार को जम्मू-कश्मीर मामले पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई थी. भारतीय सरकार के जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करने के एक साल पूरा होने के दिन यह बैठक बुलाई गई.

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