बड़ी संख्या में शहरों से पलायन कर गांव तक पहुंच रहे प्रवासी श्रमिकों को क्वारंटाइन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। भीषण गर्मी के चलते इनको बाहर रखा नहीं जा सकता है और गांव में इतने ज्यादा मकान नहीं हैं कि सभी को अलग-अलग रखा जा सके। ऐसे में ब्लॉक या जिला स्तर पर क्वारंटाइन करने पर विचार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में यह समस्या सामने आई है। गांव में पहुंचने पर कुछ लोगों को तो स्कूलों और दूसरे भवनों में रखा जा रहा है, लेकिन अब लगातार श्रमिकों की वापसी हो रही हैं तो दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। ब्लॉक और जिला स्तर पर भी इतने लोगों के लिए व्यवस्था संभव नहीं है।

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इन केंद्रों पर खाने-पीने और गर्मी से बचने के उपाय भी नहीं हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अपनी सारी ताकत झोंकने के बाद भी सभी पहुंचे प्रवासी मजदूरों को और जो अभी पहुंचने वाले हैं उनको मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत क्वारंटाइन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।

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