New Delhi : बॉलीवुड एक्‍टर और गरीबों के मसीहा सोनू सूद ने प्रवासियों के दर्द को समझा। लगातार उन्हें घर भेज रहे हैं। लेकिन सोनू सूद के इस नेक काम को लेकर जबरदस्‍त राजनीतिक ड्रामा शुरु हो चुका हैं। मुश्किल समय में प्रवासी मजदूरों के मसीहा बनें सोनू सूद को लेकर अब महाराष्‍ट्र की राजनीति गर्मानें लगी हैं।

सोनू सूद की दरियादिली से महाराष्‍ट्र राज्य की सत्‍ता पर काबिज शिवसेना जबरदस्‍त घबराई हुई हैं। पहले शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राऊत ने सोनू सूद पर रविवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना में कटाक्ष किया और सोनू को भाजपा का आदमी बताकर पर्दे के बाहर भी एक्टिंग करनेवाला शख्स बताया था। इसके बाद सोमवार को सोनू सूद को मुम्बई के बांद्रा टर्मिनस पर प्रवासी मजदूरों को विदा करने आने की अनुमति नहीं दी गई। मुंबई में बांद्रा टर्मिनस के बाहर पुलिस ने मजदूरों से मुलाकात करने से रोक दिया।

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न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार सोमवार रात को जब सोनू सूद ट्रेन में बैठे मजदूरों से मिलने के लिए जा रहे थे तो बांद्रा टर्मिनल की रेलवे सुरक्षा बल ने उन्हें रोका था। हालांकि उन्हें बाद में जाने दिया गया। अब इस पूरे मामले में सोनू सोद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता ने ट्विटर पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें कही नहीं रोका गया था।


सोनू सूद ने अपने ट्वीट में लिखा- मुझे स्टेशन में घुसने से नहीं रोका गया था। मैं प्रोटोकॉल का पूरी तरह से सम्मान और पालन करता हूं। मैंने ट्रेन के लिए राज्य सरकार से निवेदन किया था ताकि मैं प्रवासियों को उनके घर परिवार के पास वापस भेज सकूं। सोशल मीडिया पर सोनू सूद की यह प्रतिक्रिया वायरल हो रही है। गौरतलब है कि सोनू सूद को जब रेलवे सुरक्षा बल ने रोका तो यह बात आग की तरह फैल गई।

अभिनेता के रोके जाने पर मुंबई पुलिस को सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि उन्हें मुंबई पुलिस ने नहीं बल्कि रेलवे सुरक्षा बल ने रोका था। निर्मल नगर पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक शशिकांत भंडारे ने कहा- अभिनेता को रेलवे पुलिस बल ने रोका था न कि मुंबई पुलिस ने। वह गृह राज्य जा रहे कुछ मजदूरों से मिलना चाहते थे।

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